धर्मशाला | विधानसभा सत्र के छठे दिन दो महत्त्वपूर्ण प्रदर्शनों ने तपोवन का तापमान बढ़ाया। गहमा गहमी की शुरुआत ओबीसी आरक्षण को लेकर प्रदर्शन से शुरु हुई लेकिन वह शांतिपूर्वक रूप से संपूर्ण हुआ। इस प्रदर्शन के शांत होते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की विशाल रैली सरकार के खिलाफ नारे लगाती हुई सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भीड़ लेकर जोरावर स्टेडियम पहुंची। शुरुआत में तो यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लगभग एक घंटे बाद भीड़ द्वारा बैरिकेड को पार कर के विधानसभा की ओर जाने की कोशिश की, जिस दौरान एक महिला पुलिस कर्मी नीचे गिर गई।
इस पर पुलिस अधीक्षक अशोक रतन के नेतृत्व में उपस्थित पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया गया। इस लाठीचार्ज में दस कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें दो युवतियां हैं। लाठीचार्ज के बाद सरकार व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की गई।
शिक्षा विरोधी नीतियों से तंग आकर प्रदर्शन
विद्यार्थि परिषद के कांगड़ा के जिला सह-संयोजक आयुष चौधरी ने बताया कि वह प्रदेश सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों से आहत होकर यह प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कार्य को अधर में लटकाने, हिमाचल प्रदेश तकनीकि विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर व नौणी विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति न करने व स्कूल शिक्षा बोर्ड को खोखला करने व दो हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को डी-नोटिफाई करने का आरोप लगाया।
छात्राओं को भी नहीं बख्शा
एबीवीपी की प्रदेश मंत्री नैंसी अटल ने कहा कि विधानसभा घेराव के दौरान सरकार का क्रूर व बर्बर चेहरा सामने आया है। सरकार ने संवाद की बजाय दमन को चुना है और महिला सुरक्षा का दम भरने वाली सरकार ने आज छात्राओं पर डंडे बरसाए हैं।
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