शिमला | मार्च 2022 को समाप्त अवधि के लिए भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की ओर से जारी रिपोर्ट में हिमाचल में उचित मूल्य की दुकानों (राशन डिपो) के निरीक्षण को लेकर गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2021-22 के बीच विभाग के निर्धारित निरीक्षण लक्ष्य और वास्तविक आवश्यकता के बीच बड़ा अंतर पाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि विभाग अपनी मूल जिम्मेदारी को लेकर गंभीर नहीं रहा।रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 में विभाग को 19,936 दुकानों का निरीक्षण लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए था, जबकि सिर्फ 10,560 का लक्ष्य तय किया गया। आवश्यकता के मुकाबले 47 प्रतिशत यानी 9,376 दुकानों के निरीक्षण लक्ष्य को शुरू में ही कम कर दिया गया।
इसी तरह वर्ष 2020-21 में आवश्यक निरीक्षण लक्ष्य 20,084 होना चाहिए था, जबकि विभाग ने सिर्फ 10,420 का लक्ष्य तय किया और 9,664 निरीक्षण (48%) लक्ष्य में से कम कर दिए। स्थिति 2021-22 में भी सुधरी नहीं। इस वर्ष 20,272 की आवश्यकता के मुकाबले सिर्फ 10,479 निरीक्षण लक्ष्य निर्धारित किए गए और 9,793 दुकानों (48%) को निरीक्षण दायरे से बाहर छोड़ दिया गया।
कैग ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा है कि उचित मूल्य की दुकानों की निगरानी कमजोर पड़ने से लाभार्थियों को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता, मात्रा और वितरण व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब विभाग आवश्यक निरीक्षण लक्ष्य ही निर्धारित नहीं करेगा तो निगरानी और सुधारात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया कमजोर पड़ेगी। कैग ने सलाह दी है कि विभाग निरीक्षण लक्ष्य वास्तविक आवश्यकता के अनुसार तय करे और यह सुनिश्चित करे कि सभी दुकानों का नियमित रूप से निरीक्षण हो।
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