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शिमला | मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए आईजीएमसी में हुई घटना की पुन: जांच के लिए एक नई समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, लेकिन मरीजों के साथ किसी भी प्रकार का दुव्र्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता को बनाए रखने के लिए चिकित्सकों के लिए अनिवार्य ह्यूमन बिहेवियर और मैन-मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने का निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सकों द्वारा मरीजों के साथ किए जाने वाले अच्छे व्यवहार के आधार पर उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में अंक शामिल करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मरीज या तीमारदार चिकित्सकों के साथ दुव्र्यवहार करता है, तो चिकित्सकों को इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भर रही है, ताकि स्वास्थ्य कर्मी बिना किसी मानसिक दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में अब तक सैकड़ों पद भरे जा चुके हैं और भविष्य में और भर्तियां भी की जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षित चिकित्सकों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर रही है ताकि सार्वजनिक चिकित्सा क्षेत्र में अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित किया जा सके। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, स्वास्थ्य सचिव संदीप कदम, चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. राकेश शर्मा, स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. गोपाल बेरी, विशेष सचिव डॉ. अश्वनी शर्मा एवं जितेंद्र सांजटा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डॉक्टर भी हमारे, किसी का करियर खराब करने की मंशा नहीं

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि डॉक्टर सरकार के लिए परिवार के सदस्य समान हैं और उनकी भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा सरकार की बात सुनने और ड्यूटी ज्वॉइन करने पर संतोष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने पुन: अपनी सेवाएं ज्वॉइन कर ली हैं। वह रिज मैदान पर मीडिया से बात कर रहे थे। सीएम ने कहा कि डॉक्टर पर कार्रवाई का निर्णय आईजीएमसी की गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इस पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए एक और कमेटी गठित की जाएगी, जिसे शीघ्र रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार डॉक्टरों की भावनाओं के अनुरूप गंभीरता और सहानुभूति के साथ इस विषय पर विचार करेगी। यह मामला एक निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत आता है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार किसी भी डॉक्टर का करियर बर्बाद नहीं करना चाहती। जल्द ही इस मामले के लिए कमेटी गठित कर रिपोर्ट जल्दी ही सबमेट करने को कहा जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसी के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई टर्मिनेशन, रिव्यू की अलग प्रक्रिया

सीएम ने बताया कि डॉक्टर की टर्मिनेशन के समय आईजीएमसी के डॉक्टरों की कमेटी गठित की गई थी, जिसकी सिफारिशें सरकार द्वारा नहीं, बल्कि संस्थान स्तर पर की गई थीं। उन्होंने कहा कि जल्द ही आईजीएमसी के सीनियर डॉक्टरों की एक नई कमेटी का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर की नौकरी से टर्मिनेशन डायरेक्टरेट ऑफ हैल्थ सर्विसेज द्वारा की गई थी, जबकि सीनियर रेजिडेंसी से टर्मिनेशन आईजीएमसी की कमेटी द्वारा की गई थी। इस मामले में नौकरी से टर्मिनेशन को रद्द करने और सीनियर रेजिडेंसी को बहाल करने के दो अलग-अलग पहलू हैं।


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