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शिमला। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रदेश के 100 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होगा। इसके लिए स्कूलों को तुरंत नियमों का पालन कर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके लिए स्कूलों को भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, खेल मैदान, सुरक्षा मानक और शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात जैसे सभी मापदंड पूरे करने होंगे।राजधानी शिमला स्थित स्कूल शिक्षा निदेशालय में शनिवार को आयोजित कार्यशाला में सचिव शिक्षा राकेश कंवर ने स्कूल प्रिंसिपलों को सीबीएसई से संबद्धता लेने की औपचारिकताओं से अवगत कराया। उन्होंने प्रिंसिपलों को चेताया कि किसी भी प्रकार की देरी छात्रों के हित में नहीं होगी। शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता भी प्रदान की जाएगी।

कार्यशाला के दौरान कई स्कूल प्रिंसिपलों ने संबद्धता से जुड़ी जटिलताओं को लेकर सवाल पूछे। विभागीय अधिकारियों ने मौके पर ही उनके समाधान किए। सचिव ने कहा कि सीबीएसई पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में लाभ होगा और गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि स्कूलों को पहले भवन, आधारभूत ढांचे, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान सहित सभी मानकों को पूरा करना होगा। शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, सुरक्षा मानक तथा गुणवत्तापरक शिक्षा की गारंटी भी अनिवार्य तौर पर देनी होगी। सचिव ने प्रिंसिपलों से कहा कि वे संबद्धता के नियमों को ध्यान से समझें और जल्द से जल्द आवश्यक दस्तावेज तैयार कर आवेदन प्रक्रिया शुरू करें।

शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि चयनित स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, तभी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से सीबीएसई पाठ्यक्रम वहां आरंभ हो पाएगा। कार्यशाला के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों की ओर से ऑनलाइन आवेदन करने के बाद सीबीएसई टीमें निरीक्षण करने आएंगी। स्कूलों की ओर से दी गई जानकारियों को मौके पर आकर सीबीएसई के अधिकारी जांचेंगे। सभी स्कूल प्रिंसिपलों को सही जानकारी ही पोर्टल पर अपलोड करने के भी कार्यशाला में निर्देश दिए गए।

सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के लिए बनेगा अलग कैडर
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में बदलने जा रहे 100 सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षकों का अलग सब कैडर बनेगा। मौजूदा शिक्षकों को सीबीएसई सब कैडर चुनने का विकल्प दिया जाएगा। प्रधानाचार्य, शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का चयन योग्यता, अकादमिक उत्कृष्टता और सह पाठ्यक्रम गतिविधियों में योगदान के आधार पर किया जाएगा। कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए मौद्रिक और गैर मौद्रिक दोनों प्रकार की प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना भी आरंभ की जाएगी।
नोडल अधिकारियों को सौंपा सहयोग का जिम्मा 
स्कूलों को सीबीएसई की संबद्धता दिलाने में मदद करने के लिए स्कूल शिक्षा निदेशालय में नोडल अधिकारी भी नियुक्त कर दिए हैं। अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों को यह जिम्मा सौंपा गया है। स्कूल प्रिंसिपल इन नोडल अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं उठा सकेंगे। कुछ स्कूलों ने कम भूमि होने और आधारभूत ढांचे में छोटी-छोटी कमियां होने का मामला बैठक में उठाया। इस पर शिक्षा सचिव ने कहा कि स्कूलों के पास अपना फंड भी होता है। जल्द ही आदेश जारी कर इस फंड का छोटे-छोटे कार्यों को पूरा करने के लिए प्रयोग करने की मंजूरी दे दी जाएगी।

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