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सोलन | बघाट बैंक शेयर धारकों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। बघाट बैंक ऋण घोटाले को लेकर सरकार के उदासीन रवैये व उपमुख्यमंत्री से मिले आश्वासन पर भी असंतोष जताते हुए शेयर धारकों ने अब सडक़ों पर उतरने का मन बना लिया है। शेयर धारक अब 18 दिसंबर को बैंक के बाहर सांकेतिक धरना देेंगे ताकि बैंक प्रबंधन व सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाया जा सके। शेयर धारकों ने सरकार से बैंक को एनपीए से उभारने और जमा पूंजी को सुरक्षित करने के लिए 50 करोड़ वित्तीय सहायता की मांग की थी, जिसे उपमुख्यमंत्री मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने नकार दिया।

ऐसे में बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के शेयर धारक ने राजनितिक दलों को चेताया कि यदि 80 हजार खाताधारक और शेयर धारकों के हितों की सुरक्षा नहीं की गई तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सोलन में सोमवार को आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान शेयर धारक फॉर्म के सलाहकार महेंद्र नाथ सोफत ने कहा कि सरकार और बघाट बैंक प्रबंधन पर दबाव बनाने के लिए 18 दिसंबर बैंक के बहार सांकेतिक प्रदर्शन होगा।

कर्मचारियों की नौकरी पर संकट

सरकार खाता धारकों और शेयर धारकों की बैंक में जमा करीब 500 करोड़ की पूंजी, कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित करे। सांकेतिक प्रदर्शन के बाद आगे की रणनीति तय होगी। फॉर्म आफ शेयर होल्डर ऑफ बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पहले ही बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक की तरह से लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर गहरी चिंता जता चुका है। साथ ही सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

बैंक में 11 हजार शेयर होल्डर्स के 22 करोड़ रुपए जमा

बैंक पर आरबीआई ने बैंक पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगने से खाताधारक छह महीने में मात्र दस हजार रुपए ही निकाल पाएंगे। बैंक में 11 हजार शेयर होल्डर्स का करीब 22 करोड़ जमा है, लेकिन आठ वर्षांे से उन्हें लाभांश नहीं मिला। इसी तरह करीब 80 हजार खाता धारकों के भी बैंक में 470 करोड़ जमा है।

सरकार से मांगी 50 करोड़ की मदद

फर्म का मानना है कि यदि सरकार बैंक को 50 करोड़ की आर्थिक मदद करें, तो बैंक में जमा करीब 80 हजार खाता धारकों का करीब 500 करोड़ रुपए सुरक्षित होगा। साथ ही बैंक में वित्तीय लेनदेन और लोनिंग भी शुरू हो जाएगी। फॉर्म के अध्यक्ष सोम प्रकाश गुप्ता और सलाहकार महेंद्र नाथ सोफत ने बैंक के बीओडी और प्रबंधन पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया, जिसके चलते बैंक पर आरबीआई ने 2018 में बैंक पर वित्तीय प्रतिबंध लगाकर लोनिंग बंद कर दी थी। उन्होंने कहा कि बैंक ने इसके बाद एनपीए की रिकवरी में तेजी तो आई लेकिन गिरवी संपत्ति की ओवर वैल्यू के चलते 138 करोड़ की रिकवरी बाकी है।


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