शिमला | नौ तारीख बीतने के बाद भी एचआरटीसी के हजारों कर्मियों को वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों का गुस्सा फूटा। इस दौरान चालक-परिचालकों ने मंगलवार दोपहर के समय पुराना बस अड्डे में गेट मीटिंग कर सरकार की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए जमकर नारेबाजी की। एचआरटीसी के चालक संघ के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ने कहा कि हर महीने कर्मचारियों को अपनी वेतन और पेंशनों को पेंशन के लिए नारे लगाने पड़ते हैं या सड़क पर उतरना पड़ता है। इससे हजारों कर्मचारी आहत हैं। एचआरटीसी का कर्मचारी अन्य विभागों की अपेक्षा दिनरात काम करता है। बावजूद समय पर तनख्वाह देने में भी सरकार नाकाम है।
उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रबंधन को चेताया कि अगर 24 तारीख तक उनकी सभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो सभी चालक और परिचालक एक और नोटिस जारी करने के बाद बसें चलाना बंद कर देंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह एचआरटीसी कर्मचारियों की देय वित्तीय लाभों की जिम्मेदारियां लें। मान सिंह ने कहा कि सरकार के आदेशों पर कर्मचारी दूरदराज के क्षेत्रों से लेकर हर जगह ड्यूटी दे रहे हैं। चालक रात को बस की चौकीदारी भी करता है। इसके बावजूद उसे समय पर वेतन नहीं मिलता है। इस वजह से कर्मचारियों के लिए अपना घर परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। एचआरटीसी सरकार चलाती है। ऐसे में वेतन की अदायगी की जिम्मेदारी भी प्रदेश सरकार की है।
उन्होंने कहा कि एचआरटीसी के हर कर्मचारी का सात से आठ लाख रुपये सरकार को देना है। इसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक ओवरटाइम और वर्ष 2016 से एरियर की अदायगी भी शामिल है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर सरकार से एचआरटीसी का संचालन नहीं होता है तो वह इसे बंद कर दे लेकिन इस तरह से कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ न करें।
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