शिमला | आईजीएमसी में गत सोमवार को डाक्टर और मरीज के बीच हुई झड़प के मामले में वायरल हुए वीडियो के आधार पर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी डाक्टर को बर्खास्त कर दिया है। निदेशक चिकित्सा शिक्षा की ओर से टर्मिनेशन आर्डर जारी किए गए हैं। ये तुरंत प्रभाव से लागू होंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद बुधवार रात को स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल इस रिपोर्ट के बाद की परिस्थितियों पर चर्चा करने के लिए देर तक दफ्तर में थे। हालांकि रिपोर्ट में इस झड़प के लिए मरीज और डाक्टर दोनों को जिम्मेदार बताया गया है, लेकिन डाक्टर के व्यवहार को सही न मानते हुए यह कार्रवाई हुई है। मंगलवार को ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली से लौटकर इस घटना का कड़ा संज्ञान लिया था। जांच रिपोर्ट के लिए 24 घंटे का समय दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि ऐसी कार्रवाई की जाए कि किसी भी सरकारी संस्थान में इस तरह की घटना दोबारा न हो। इन्हीं निर्देशों को देखते हुए जांच रिपोर्ट आने के बाद अब आरोपी डाक्टर के टर्मिनेशन की सहमति बनी।
संबंधित डाक्टर जॉब ट्रेनी पॉलिसी के तहत इसी साल अगस्त महीने में नियुक्त हुआ था। इसके बाद उसे रजिस्ट्रारशिप अलग से मिली थी। यह श्वास रोग विभाग में थी। अब आरोपी डाक्टर की बर्खास्तगी सीनियर रेजिडेंसी और निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं की नौकरी दोनों से हुई है। अनुशासन समिति की रिपोर्ट में भी डाक्टर द्वारा की गई मारपीट को जस्टिफाई नहीं किया जा सका है। इस रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने को लेकर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के सुझाव भी हैं। इन पर सरकार बाद में निर्णय लेगी। सीनियर रेजिडेंसी से पहले ऐसे डाक्टरों के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग के निर्देश मुख्यमंत्री पहले ही दे चुके हैं, लेकिन टर्मिनेशन जैसी सख्त कार्रवाई कर राज्य सरकार ने इस तरह की घटनाओं के मामले में सख्त अनुशासनात्मक संदेश दिया है। इस झड़प में पीटे गए मरीज भी अभी आईजीएमसी में भर्ती है। आरोपी डाक्टर ने भी स्ट्रेस मैनेजमेंट और हाथ में लगी चोट के बाद अस्पताल में भर्ती होना ही ठीक समझा था।
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