Spread the love

शिमला | करोड़ों रुपए की रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों में घिरे ईडी के शिमला में तैनात रहे तत्कालीन असिस्टेंट डायरेक्टर विशाल दीप और उनके भाई विकास दीप के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर लिया है। यह केस चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता स्वयं सीबीआई चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर अरुण अहलावत हैं, जिनकी लिखित शिकायत के आधार पर यह एफआईआर दर्ज हुई है। सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार विशाल दीप और उनके भाई विकास दीप ने एक तय जांच अवधि के दौरान अपनी ज्ञात और वैध आय से करीब 231.48 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की।

सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 12 सहपठित धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1) के तहत आपराधिक कदाचार का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि एक लोक सेवक होने के बावजूद विशाल दीप ने अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की और इसमें उनके भाई विकास दीप ने सहयोगी की भूमिका निभाई। सीबीआई इंस्पेक्टर अरुण अहलावत द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक विशाल दीप के खिलाफ यह कार्रवाई पहले से दर्ज दो ट्रैप मामलों के दौरान बरामद भारी मात्रा में नकदी और आपत्तिजनक दस्तावेजों के बाद शुरू की गई प्रारंभिक जांच का परिणाम है।

आरोपी अधिकारी के भाई की भूमिका पर भी सवाल

सीबीआई का कहना है कि जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ईडी अधिकारी विशाल दीप के भाई विकास दीप, जो पंजाब नेशनल बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं, ने न केवल अपने खातों बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों के खातों का भी इस्तेमाल किया। इन खातों के जरिए बड़ी रकम का लेन-देन किया गया, जिससे अवैध संपत्ति छिपाने और स्थानांतरित करने में मदद मिली। इसी आधार पर सीबीआई ने विकास दीप को इस मामले में सहयोगी आरोपी बनाया है। यह पूरा मामला हिमाचल प्रदेश के चर्चित छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़ा हुआ है।

विशाल दीप उस समय इस घोटाले की जांच कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने इस मामले में फंसे लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाकर करीब अढ़ाई करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी। आरोपितों ने इसकी शिकायत सीबीआई से की और उसके बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।


Discover more from The Insight Mirror

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Discover more from The Insight Mirror

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading