कुल्लू । इंद्रदेव बारिश की बछौरें बरसाने में रूके नहीं, लेकिन देवलुओं ने भी बारिश में तपस्या कर सच्ची आस्था का प्रमाण दिया। विश्व के सबसे बड़े देव समागम यानी अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के चौथे और पांचवें दिन जमकर बारिश हुई। बारिश में भी अपने-अपने अराध्यों के साथ आए कारकूनों ने अपनी तपस्या को कायम रखा। टैंट और बिस्तर गीले होने के बाद भी बारिश में तपस्वी बन बैठे रहे। हालांकि बीते रविवार को भी मौसम खराब हुआ था। दोपहर को यहां बारिश हुई थी। रात को फिर मौसम ने करवट बदली और बारिश शुरू हुई।
बारिश का पानी कई टैंटों में घुस गया, लेकिन अठारह करडू की सौह ढालपुर में तपस्वी बने कारकूनों ने कठिनाई के बीच भी आस्था को भंग होने नहीं दिया। उन्होंनें देव शिविरों में ही रात बिताई। बता दें कि दशहरा उत्सव में लगभग 300 के आसपास देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी की चाकरी करने आए हैं। लगभग हर दिन 10 से 15 हजार के करीब कारकून सात दिनों तक तपस्या में बैठते हैं। इनमें कारदार, पुजारी, गूर, धामी, भंडारी, बांठ, बजंतरी सहित अन्य मुख्य कारकून शामिल होते हैं। मौसम कितना भी परेशान करें, लेकिन ये अपने अराध्यों और स्थान को कभी नहीं छोड़ सकते।
देवी-देवताओं के रिश्ते
कुल्लू — देवी देवता भी आपस में रिश्तों की डोर को भली-भांति से निभाते हैं, जिसका जीता जागता उदाहरण अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे में बखूबी से देखने को मिलता है। यहां पर करीब 300 से ज्यादा देवी-देवता दशहरा की शोभा को बढ़ा रहे हैं और जिसमें कई देवी देवता आपस में मिलकर के रिश्तों को निभा रहे हैं।
देवता के कारकून बोले
190 किलोमीटर दूरी से आए आनी तांदी के देवता कुई कंडा नाग के गूर विनोद ठाकुर का कहना है कि देवभूमि कुल्लू के लोग देव आस्था पर अटूट आस्था रखते हैं। देवी-देवता साथ हैं, इसलिए वे चुनौतियों से भी नहीं डरते हैं।
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