शिमला | आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम की तेज गेंदबाज शिमला की बेटी रेणुका ठाकुर रविवार को अपने गृह क्षेत्र रोहड़ू पहुंचीं। रेणुका ने कहा कि मां से कड़ी मेहनत की सीख मिली। उनकी सफलता में मां सुनीता ठाकुर और चाचा भूपिंद्र ठाकुर का विशेष सहयोग रहा। मेहनत की कभी हार नहीं होती। विश्व कप जीतने के बाद लड़कियों की रुचि क्रिकेट में और बढ़ेगी। आने वाले विश्व कप को जीतने के लिए भी अभी से प्रयास शुरू हो गए हैं। घर जाने से पहले उन्होंने हाटकोटी मंदिर में माथा टेका। जब लोगों ने नारेबाजी के साथ रेणुका का स्वागत किया तो रेणुका ठाकुर ने अपनी मां का हाथ पकड़ा और भावुक हो गई। वहीं पूरे स्वागत कार्यक्रम में रेणुका ठाकुर ने अपनी मां का हाथ पकडक़र ही रखा।
लोगों ने बड़े शौक और इस ऐतिहासिक पल को याद करने के लिए रेणुका ठाकुर के साथ सेल्फी ली और उनका ओटोग्राफ भी लिया। वहीं एसडीएम कार्यालय के चांशल सम्मेलन कक्ष में रोहडू प्रशासन ने भव्य स्वागत किया। एसडीएम रोहडू धर्मेश रामोत्रा ने उन्हें शाल व टोपी पहनाकर स्वागत किया। रोहडू में रेणुका को चांदी का मुकुट भी पहनाया गया।
वल्र्ड कप में ही तय किया था, पहले घर जाउंगी
रेणुका ठाकुर ने बताया कि मैंने पहले ही सोचा था कि वल्र्ड कप जीतने के बाद पहले मैं अपनी मां से मिलने अपने गांव जाउंगी। उसके बाद अपने गांव के देवताओं के मंदिर में पुजा करूंगी। इसलिए मैं वल्र्ड कप जीतने के बाद कहीं नहीं गई और गांव आ गई।
13 साल की उम्र में पहुंचाया एचपीसीए
रेणुका ठाकुर के चाचा भूपेंदर सिंह ठाकुर ने सबसे पहले रेणुका के अंदर हुनर तलाशा और उसे 13 साल की उम्र में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट अकादमी (एचपीसीए) धर्मशाला तक पहुंचाया। पिता का साया तीन साल की उम्र में उनके सिर के ऊपर से हट गया था।
पेंटिंग बनाकर दूर करती थी तनाव
रेणुका ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान लगातार तनाव बना रहता है। इस तनाव को दूर करने क लिए ड्रेसिंग रूम में पहले से हंसी-खुशी का माहौल तैयार किया जाता है। इसलिए मैंने भी मोर की पेंटिंग बनाकर तनाव को दूर कर सकारात्मक उर्जा का संचार करने का प्रयास किया। कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए परिवार के सहयोग के साथ दिन-रात कड़ी मेहनत की जरूरत रहती है।
परिवार ने दी दावत
रेणुका ठाकुर के आगमन पर घर वालों ने खुशी में दावत रखी है। इसमें सैकड़ों लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई है। वहीं इस मौके रेणुका ठाकुर के परिजनों को भी सम्मानित किया गया। सभागार में रेणुका ठाकुर की बायोग्राफी भी दिखाई गई। किस तरह से 1996 में जन्मी रेणुका ने परिवार के सपनों को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत की और यह मुकाम हासिल किया। इस कड़ी में रेणुका ने अपनी माता और मामू का विशेष जिक्र भी किया।
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