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कुल्लू । देवताओं के अस्थायी शिविरों में परंपराओं का उल्लंघन हुआ तो देवता भृगु ऋषि और देवलुओं का गुस्सा तहसीलदार कुल्लू पर फूट पड़ा। बिना जूते उतारे और नियमों की अनदेखी कर शिविर में प्रवेश करने पर न सिर्फ देवताओं ने नाराजगी जताई, बल्कि तहसीलदार को पकड़कर अस्थायी शिविर तक ले जाया गया। माफी मांगने के बाद स्थिति शांत हुई। इस घटना ने प्रशासन और स्थानीय संस्कृति के बीच की संवेदनशीलता को फिर से उभार दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस विवाद की जीवंत गवाही बन गया है। देवता भृगु ऋषि ने गूर के माध्यम से इस पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद देवलू मेला कमेटी ऑॅफिस से तहसीलदार को देवता भृगु ऋषि के अस्थायी शिविर के पास ले गए। देवता से माफी मांगने के बाद देवलू और देवता शांत हुए। नीणू के देवता नारद मुनि और आशणी के देवता भृगु ऋषि भी आ गए थे। तीनों देवताओं के समक्ष तहसीलदार ने माफी मांगी। काफी देर तक माहौल हंगामेदार बना रहा।

बुधवार को अधिकतर देवता अस्थायी शिविरों में पहुंच गए थे। देवता के अस्थायी शिविर में तहसीलदार पहुंचे थे। देवलुओं के अनुसार तहसीलदार बिना जूते उतारे देवता भृगु ऋषि के शिविर में गए। इससे देवता नाराज हो गए। देवलुओं का गुस्सा भी तहसीलदार पर फूट पड़ा। स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर पुलिस की टीम भी पहुंची। माफी के बाद ही देवता शांत हुए।

देवताओं के हैं अपने नियम
कुल्लू घाटी में देवी-देवताओं के अपने नियम हैं। देवता के अस्थायी शिविरों में नंगे सिर प्रवेश करने पर मनाही रहती है। जूते, चमड़े और नशे वाली चीजें देवता के अस्थायी शिविरों में ले जाना वर्जित होता है। प्रशासन और अधिकारियों को भी यह नियम मानने पड़ते हैं।

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